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चंपावत के बाराकोट में बुजुर्ग महिला को डोली पर बैठा कर चले तीन किमी, अफसर लापरवाह , सड़क नही

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उत्तराखंड में सरकारी महकमे की लापरवाही का आलम ये है कि सड़कें हैं नहीं, किसी तरह सड़क कटी तो डामर नहीं, डामर है तो चलता नहीं। ऐसा ही कुछ हाल है चंपावत के बाराकोट ब्लाक के कोठेरा – पटयूरा सड़क का। ग्रामीणों की लंबी लड़ाई के बाद इस मार्ग को स्वीकृत कराया। बड़े संघर्ष के बाद ये सड़क काटी गई। लेकिन अफसरों की लापरवाही देखिए कि ये सड़क काट तो दी गई लेकिन अधूरा काम छोड़ दिया गया। न तो सड़क पर सही तरीके से गिट्टी डालकर समतल किया गया और न ही इसका डामरीकरण किया गया। सरकारी तंत्र के कामकाज का ये रवैया है कि महीनों से ये सड़क यूं ही पड़ी हुई है लेकिन इसको बनाने की जहमत अधिकारियों ने नहीं उठाई। मानों उन्हें जनता की परेशानियों से कोई लेना देना ही न हो। अफसरों की लापरवाही इतनी भारी पड़ी है कि काटी गई सड़क बारिश के मौसम में जगह जगह से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है। सड़क न होने से आसपास के गांवों में लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालात ये हैं कि सोमवार को देवकी देवी नाम की एक वृद्ध महिला की तबियत बिगड़ने पर उन्हे अस्पताल ले जाने की नौबत आ गई। इसके बाद ग्रामीणों ने डोली का इंतजाम किया और कई किलोमीटर तक वृद्धा को डोली पर लादकर लाया गया। इसके बाद उन्हे चिकित्सा उपलब्ध कराई जा सकी।
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